मोह माया
मोह माया
ज़ब मनुष्य धर्म सम्बंधित विचार सुनता है तो उसके मन में अच्छे विचारों का उदय होता है | इसी प्रकार ज़ब मनुष्य किसी मृत शरीर के साथ शमसान भूमि मे जाता है तो वह समझता है की यह शरीर नश्वर है, उस समय उसके मन मे पापो से मुक्त होने की सदभावना उत्पन्न होती है,,|
ऐसे हि ज़ब मनुष्य रोगग्रस्त होता है तब वह भगवान को याद करता है और उस समय वह यह सोचता है की ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे वह दोबारा बीमार या रोगी हो जाये,
यदि मनुष्य सदैव ऐसा हि सोचता रहे तो वह संसार के बंधनों से छूट सकता है, परंतु होता यह है की ज़ब मनुष्य धर्मसभा से उठ जाता है शमशान से लोट आता है,,और रोग से मुक्त हो जाता है,तो वह फिर से संसार के उसी मोहमाया मै फस जाता है... यही मोह माया है ||
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