Power ऑफ़ Mony 🌹🌹

तयजन्ति मित्रानी धनैर्विहीनं दाराश्च भृत्याश्च सुह्रज्जश्च|

तं चार्थवन्तं पुनराश्रयन्ते अर्थो हि लोके पुरुषस्य बंधु:||

ज़ब मनुष्य के पास धन नहीं रहता तो उसके मित्र,स्त्री, नौकर-चाकर और भाई-बन्धु सब उसे छोड़कर चले जाते है|
यदि उसके पास फिरसे धन सम्पति आ जाए तो वे फिर उसका आश्रय ले लेते है, संसार मे धन हि मनुष्य का बन्धु है..||



 




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